अग्निधर्मा में प्रकाशित लेख: गणेश से January तक ...

जनवरी (January) और गणेश : आरंभ के देवता
हमारे भारतीय कैलेंडर का पहला महीना “जनवरी” (January) है। इसका नाम पड़ा जेनस (Janus) नामक रोमन देवता पर। जेनस को द्वारों और आरंभों का देवता माना जाता था। उसे दो चेहरों के साथ चित्रित किया जाता था – एक चेहरा पीछे की ओर (अतीत की ओर) और दूसरा सामने की ओर (भविष्य की ओर)। वर्ष की शुरुआत, नए उपक्रम और परिवर्तन की घड़ी में रोमन लोग उसी की पूजा करते थे।

संस्कृत परंपरा में गणेश उसी आदर्श की झलक दिखाते हैं। गण का अर्थ है समूह, समुदाय, श्रेणी, और ईश का अर्थ है स्वामी। गणेश यानी “गणों के स्वामी”, “आरंभ के स्वामी।” किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या अनुष्ठान की शुरुआत उन्हीं के आह्वान से की जाती है। वे विघ्नहर्ता हैं – बाधाओं को दूर करने वाले और आरंभ को मंगलमय बनाने वाले।

भाषाई दृष्टि से देखें तो जनवरी और गणेश सीधे एक ही जड़ से नहीं निकले हैं। जनवरी का संबंध लैटिन Ianuarius और देवता Janus से है, जो आगे चलकर प्रोटो-इंडो-यूरोपीय धातु ieh₁- (“जाना, पार करना”) से जुड़ता है। वहीं गणेश संस्कृत की धातु √गण् (“गिनना, समूह बनाना”) और ईश (“स्वामी”) से बनते हैं।

फिर भी, दोनों में गहरा वैचारिक साम्य है। जेनस और गणेश दोनों “सीमांत देवता” हैं – जो पुराने और नए के बीच खड़े रहते हैं, दहलीज के रक्षक हैं और नई शुरुआत का मार्ग खोलते हैं। जेनस को नए साल और जनवरी के आरंभ में याद किया जाता था, जबकि गणेश को हर मंगल कार्य के आरंभ में पूजना अनिवार्य माना जाता है।

इस प्रकार, जनवरी (January)
और गणेश अलग भाषाई परंपराओं के होने पर भी समान इंडो-यूरोपीय आदर्श को प्रकट करते हैं। दोनों ही शब्द आरंभ, मार्ग-प्रवेश और नई यात्रा के प्रतीक हैं।

संक्षेप में:
जेनस (जनवरी का देवता) = समय और परिवर्तन का रक्षक।

गणेश = सभी उपक्रमों का आरंभकर्ता, विघ्नहर्ता।
दोनों परंपराओं में एक ही सांस्कृतिक विचार जीवित है – हर आरंभ के पीछे एक देव शक्ति है जो द्वार खोलती है और आगे का मार्ग प्रशस्त करती है।

डॉ. राहुल खटे,
राजभाषा अधिकारी,
भारतीय स्टेट बैंक, नांदेड
मोबाइल क्र. : 9483081656

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